बुढ़ापे में याददाश्त हर लेता है प्रोटीन
उम्र के साथ छोटी-मोटी रोजमर्रा की बातें भूल जाना एक आम बात है । हाल ही में प्रकाशित एक शोध पत्र का दावा है कि यह सब एक प्रोटीन उम्र के साथ आपके खून में बढ़ता रहता है । शोधकर्ताओं का तो मानना है कि इस प्रोटीन को थामकर हम बुढ़ापे में होने वाली संज्ञान सम्बंधी समस्याओं की रोकथाम कर सकते हैं ।
वैसे तो पहले भी कई वैज्ञानिक दर्शा चुके हैं कि बूढ़े चूहों का रक्त देने पर युवा चूहे सुस्त, कमजोर और भुलक्कड़ हो जाते है । इसी प्रकार से युवा खून मिलने पर बूढ़े चूहों की याददाश्त और चुस्ती लौटाई जा सकतह है । इसी सिलसिले में सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के तंत्रिका वैज्ञानिक सौल विलेडा ने खून में वह कारक ढूंढ निकाला है जो इस तरह के प्रभावोंमें योगदान देता है । यह प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ा एक प्रोटीन है जिसका नाम बीटा-2 माइक्रोग्लोबुलिन (इंच) है । पहले यह देखा जा चुका था कि अल्जाइमर व अन्य संज्ञान सम्बंधी दिक्कतों से पीडि़त व्यक्तियों के रक्त में इंच का स्तर अधिक होता है । विलेडा और उनके साथियों ने विभिन्न उम्र के चूहों और मनुष्यों में इंच का स्तर नापा । देखा गया कि यह स्तर उम्र के साथ बढ़ता है ।
अब जब शोधकर्ताओं ने 3 माह उम्र के चूहों को इंच का इंजेक्शन दिया तो अचानक उनकी याददाश्त में दिक्कतें पैदा हो गई । जिस भूल-भुलैया को पहले वे आसानी से पार कर जाते थे, इंच इंजेक्शन के बाद वे उससे जूझ पाने में असमर्थ हो गए । यह भी देखा गया कि इंच इंजेक्शन मिलने के बाद उनके मस्तिष्क मेंनई तंत्रिकाएं भी कम बन रही थीं । इसके बाद यह देखने की कोशिश की गई कि क्या इंच का स्तर घटाने से बूढ़े चूहों में याददाश्त की क्षति की रोकथाम की जा सकती है । विलेडा की टीम ने कुछ चूहों में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए यह स्थिति पैदा कर दी कि उनमें इंच प्रोटीन बनना बंद हो गया ।
सामान्य चूहों की अपेक्षा ये इंच रहित बूढ़े चूहे सीखने व याददाश्त के मामले मेंबेहतर साबित हुए, लगभग युवा चूहों के बराबर । अध्ययन के परिणाम उत्साहजनक है क्योंकि इनसे पता चलता है कि बुढ़ापे की संज्ञान सम्बंधी दिक्कतों की रोकथाम के लिए मस्तिष्क की बजाय रक्त के स्तर पर हस्तक्षेप करे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं । मगर इस विचार की वास्तविक परख तो तब होगी जब चूहों से आगे बढ़कर मनुष्यों पर प्रयोग किए जाएंगे ।
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